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अद्भुत चमत्कार: जिसका चल रहा था किरया करम, वह भरमौर में जिंदा मिला

 अद्भुत चमत्कार: जिसका चल रहा था किरया करम, वह भरमौर में जिंदा मिला: भटियात की खदेट पंचायत से लापता चल रहे व्यक्ति की जगह किसी और व्यक्ति का अंतिम संस्कार करके किरया करम करने का मामला सामने आया है। किरया करम के दौरान ही व्यक्ति भरमौर में जिंदा भी मिल गया है। लोगों में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। गौरतलब है कि उत्तम चंद पुत्र रोजगारी राम निवासी चमड़ोई पंचायत खडेट जोकि आर्मी से बोर्ड पैंशन पर है तथा मानसिक रूप से पूरी तरह सक्षम भी नहीं है और बिना बताए कई दिनों तक घर से बाहर रहता है। पिछले कई दिनों से उत्तम चंद के चम्बा जाने की घर वालों को जानकारी थी तथा ज्यादा दिन तक वह वापस भी नहीं आया।

अंगूठी व जूतों को आधार बनाकर कर दिया शव का अंतिम संस्कार

इसी दौरान पुलिस द्वारा एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने की जानकारी प्राप्त हुई, जिस पर उत्तम चंद के परिजनों तक भी यह खबर पहुंच गई। परिजनों ने आशंका जताते हुए मौके पर मृतक व्यक्ति की अंगूठी व जूतों को आधार बनाकर उत्तम चंद ही मान लिया तथा उस शव को चमडोई लाकर 18 अगस्त को सामाजिक परंपराओं के तहत अंतिम संस्कार कर दिया गया। वर्तमान में किरया करम के दिन घर में चल रहे थे। उत्तम चंद जिसे फौजी के नाम से इलाके की अधिकांश जनता जानती है, उसके मरने की जानकारी अधिकांश लोगों तक पहुंच गई थी।

मणिमहेश की यात्रा पर गए व्यक्ति को रास्ते में मिला उत्तम सिंह

इसी दौरान भरमौर मणिमहेश की यात्रा पर गए साथ लगती खनोड़ा पंचायत के हैप्पी नामक व्यक्ति को उत्तम सिंह रास्ते में मिला। उसे देख कर वह भी आश्चर्यचकित रह गया। उसने मंगलवार को उत्तम के घर वालों को सूचना दी तथा बुधवार को चौरासी से उत्तम चंद को परिजन घर ले आए तथा मौके से फोन व सैल्फी से यह पुष्टि भी कर दी कि उत्तम चंद सलामत है तथा घर में 10 दिन तक चलने वाले किरया करम को भी बंद कर दिया है।

किस व्यक्ति का कर दिया अंतिम संस्कार?

चर्चा का विषय अब यह बन गया है कि यहां पर किस व्यक्ति का अंतिम संस्कार कर दिया गया और यहां रखी अस्थियों का अब क्या किया जाए। यह भी गांव वालों के लिए समस्या बन गई है। लोगों ने इन अस्थियों को गंगा में ही विसॢजत करने का निर्णय लिया है। पंचायत प्रधान खदेट कृष्ण चंद ने कहा कि उत्तम चंद ठीक-ठाक है और उसे भरमौर के चौरासी से परिवार के लोग जाकर ले आए हैं। उन्होंने कहा कि बरसात के हादसे के कारण शव पहचानने लायक नहीं था तथा अंगूठी व जूते मेल खा रहे थे, जिससे उसे अपनाकर अंतिम संस्कार किया गया था।

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